Puneet is Happpyyyy..!!!! :) :)
इश्क में तेरे इस क़दर दीवाना हुआ हूँ,
लगता है जैसे, मैं ही बस एक पागल हुआ हूँ.
उफ़..!! हश्र जो हुआ है ये मेरे दिल का,
कैसे कहूँ, अदाओं से तेरी घायल हुआ हूँ.
नशा निगाहों का तेरी, क्या कहूँ,
देख कर उन्हें, बेसुधगी का पैमाना हुआ हूँ.
सवाल कई करते हैं मुझसे, इश्क से जुड़े,
मोहब्बत का मैं जैसे कोई ठिकाना हुआ हूँ.
फिरता हूँ जो अब गलियों में तेरी,
लोग कहते हैं आवारा बादल हुआ हूँ.
सच ही तो कहता हूँ मैं, नींद नहीं आती तुझे,
जब से आँखों का मैं तेरी काजल हुआ हूँ.
चाहे तू ना कहे, लेकिन मुझे खबर है,
दीवानगी का तेरी मैं आलम हुआ हूँ.
I wished to add something as "सावन हुआ हूँ..." par kuchh likh nahi paya... :(
हे यकीन मुझे
Posted by
Puneet Sahalot
on Saturday, May 22, 2010
Labels:
Expressions
/
Comments: (0)
हे यकीन मुझे, ये ज़माना भी देखेगा,
डूबा था ये सूरज कल जिधर,
उधर से ही कल फिर निकलेगा....
खुदा भी कब तक क्या करेगा,
नियति के नियम को
ये बंदा उसी का बदलेगा...
डूबा था ये सूरज कल जिधर,
उधर से ही कल फिर निकलेगा....
खुदा भी कब तक क्या करेगा,
नियति के नियम को
ये बंदा उसी का बदलेगा...
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