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engineer बनने का, मज़ा ही कुछ और है.

this poem is inspired by a very renowned poet of our country Late Mr. Om Vyas' poem "mazaa hi kuchh or hai" . I have tried to describe the fun an engineering student has during the exams n during all the four years of his/her engineering life... :) :) Engineering Rocks..!!! :) :) 
exam में बेफिक्र रहने का,

मस्त हो कर exam देने का,
मज़ा ही कुछ और है. 

"कितना पढ़ लिया" पूछने का,
"कुछ नहीं" सुनकर खुश होने का,
मज़ा ही कुछ और है.

दिन भर घूमने का,
पढ़ते वक़्त उन्गने का,
मज़ा ही कुछ और है.

रात को एक unit करने का,
सुबह उठकर तीन पढने का,
मज़ा ही कुछ और है.

exam hall में देर से घुसने का, 
एन वक़्त पर किताब चूमने का,
मज़ा ही कुछ और है.

खाली बैठ सोचने का, 
दुसरो को सर खुजाता देखने का,
मज़ा ही कुछ और है.

extra sheet वाले को गालियाँ देने का,
paper देख उबासियाँ लेने का,
मज़ा ही कुछ और है. 

hall से निकल कर हंसने का 
paper discuss कर तंग करने का,
मज़ा ही कुछ और है.

खुद कुछ ना करने का,
"तेरा गलत है" कहने का,
 मज़ा ही कुछ और है.

हर महीने exam देने का,
back बचा कर पास होने का,
मज़ा ही कुछ और है.

चार साल ऐश करने का,
फिर भी engineer बनने का,
मज़ा ही कुछ और है. 
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