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आग ये सीने में लगी रहती है....


चुभती है जो बातें लोगों की,
मुझे जीतने को मजबूर करती रहती हैं,
जीत जाना शामिल तो नहीं आदत में मेरी,
पर क्या करूँ जो आग ये सीने में लगी रहती है....


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