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एक जान होने लगे हैं....

अरमान मोहब्बत में बढ़ने लगे हैं,
जज्बातों में हम पिघलने लगे हैं,
फासलें कम हो रहे हैं इस तरह,
दो जिस्म थे एक जान होने लगे हैं....





[image from flickr]

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