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आग ये सीने में लगी रहती है....


चुभती है जो बातें लोगों की,
मुझे जीतने को मजबूर करती रहती हैं,
जीत जाना शामिल तो नहीं आदत में मेरी,
पर क्या करूँ जो आग ये सीने में लगी रहती है....


दुखी कोई आदतन नहीं होता...


कौन कहता है मुझे तेरे जाने का गम नहीं होता,
दुखी कोई शख्स आदतन नहीं होता...
धड़कता ये दिल तब भी है, मगर,
अंदाज़ धड़कने का रोज़ सा नहीं होता...

एक जान होने लगे हैं....

अरमान मोहब्बत में बढ़ने लगे हैं,
जज्बातों में हम पिघलने लगे हैं,
फासलें कम हो रहे हैं इस तरह,
दो जिस्म थे एक जान होने लगे हैं....





[image from flickr]

नयी ज़िन्दगी चाहिए ...

चंद लम्हे चाहिए तुझे अपना बनाने के लिए,
थोडा सा सुकून चाहिए तुझे पास बुलाने के लिए,
जुदा हो जाऊं तुझसे किस तरह,
एक नयी ज़िन्दगी चाहिए तुझे भुलाने के लिए.
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