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हर लम्हे में ज़िन्दगी के
बस तुझे ही देखा है...
मैं नहीं जानता कब से, मगर,
दिल ये मेरा, तुझे अपना खुदा बना बैठा है...

2 comments:

योगेश स्वप्न said...

puneet bahut kam likh rahe ho , likhte raho, all the best. achcha likha hai.

संजय भास्कर said...

बहुत खूब, लाजबाब !

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