Theme Preview Rss

घर अपना जन्नत सा लगता है...

छोटा सा ही सही,
घर अपना तो जन्नत सा लगता है.
दो कमरे, चार दीवारें हो चाहे तेरे लिए,
मेरे लिए तो यहाँ सारा जहां बसता है...

सूरज खिले चाहे कहीं से,
सवेरा मेरा तो इस दर से होता है.
दो चिरागों से ही रोशन सही,
घर मेरा किसी महफ़िल सा सजता है.

मंदिर - मस्ज़िद ना फिरूं चाहे,
आशीर्वाद तो सच्चा माँ-पिता से मिलता है.
कहूँ क्या मैं उस नन्ही परी से,
प्यार उससे तो दिल बेशुमार करता है.

छोटा सा ही सही,
घर अपना तो जन्नत सा लगता है.
Related Posts Widget for Blogs by LinkWithin