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Reading it over and over again....

There was a time when I used to say this to her... 

" The day is not fine,
but I have faith with me,
everything will be back to,
as it used to be,
The day is not fine,
but I have faith with me..."
Might be, I never understood it wasn't so easy... But, today I realised it isn't so easy... 
Saying sorry 1000 times won't change any thing... Time is the best healer but that won't work for lifetime.... 
and the pen stops writing.... leaving tears in my eyes.... 
I wish I could make her smile.... 

वो मेरे नाम कि मेहंदी लगाती है....


हाथों को अपने मुझसे छुपाती है,
वो मेरे नाम कि मेहंदी लगाती है.
रंग गहरा देख देख शर्माती है,
हाय! ये हरकतें उसकी, अदाएं कहलाती है...

याद...

तुझे आज भी मेरी याद आती है..
तू नहीं, मुझे ये मेरी हिचकियाँ बताती है...

जाने कहाँ मोहब्बत सारी चली गयी


जाने कहाँ मोहब्बत सारी चली गयी,
वो बातें प्यारी, यादें निराली,
एक पल में ज़िन्दगी सारी बदल गयी.

गलतियों के दौर से गुज़रा मैं इस तरह,
माफ़ी कि हसरतें भी बदल गयी.

यादों को अब जलाऊं, भुलाऊं किस तरह,
ख़ाक हो कर भी फिर से यादों में बदल गयी.

जाने कहाँ मोहब्बत सारी चली गयी,
जिन राहों पे चले थे, उनकी मंजिलें बदल गयी.

engineer बनने का, मज़ा ही कुछ और है.

this poem is inspired by a very renowned poet of our country Late Mr. Om Vyas' poem "mazaa hi kuchh or hai" . I have tried to describe the fun an engineering student has during the exams n during all the four years of his/her engineering life... :) :) Engineering Rocks..!!! :) :) 
exam में बेफिक्र रहने का,

मस्त हो कर exam देने का,
मज़ा ही कुछ और है. 

"कितना पढ़ लिया" पूछने का,
"कुछ नहीं" सुनकर खुश होने का,
मज़ा ही कुछ और है.

दिन भर घूमने का,
पढ़ते वक़्त उन्गने का,
मज़ा ही कुछ और है.

रात को एक unit करने का,
सुबह उठकर तीन पढने का,
मज़ा ही कुछ और है.

exam hall में देर से घुसने का, 
एन वक़्त पर किताब चूमने का,
मज़ा ही कुछ और है.

खाली बैठ सोचने का, 
दुसरो को सर खुजाता देखने का,
मज़ा ही कुछ और है.

extra sheet वाले को गालियाँ देने का,
paper देख उबासियाँ लेने का,
मज़ा ही कुछ और है. 

hall से निकल कर हंसने का 
paper discuss कर तंग करने का,
मज़ा ही कुछ और है.

खुद कुछ ना करने का,
"तेरा गलत है" कहने का,
 मज़ा ही कुछ और है.

हर महीने exam देने का,
back बचा कर पास होने का,
मज़ा ही कुछ और है.

चार साल ऐश करने का,
फिर भी engineer बनने का,
मज़ा ही कुछ और है. 

दीवानगी का आलम हुआ हूँ...


इश्क में तेरे इस क़दर दीवाना हुआ हूँ,
लगता है जैसे, मैं ही बस एक पागल हुआ हूँ.

उफ़..!! हश्र जो हुआ है ये मेरे दिल का,
कैसे कहूँ, अदाओं से तेरी घायल हुआ हूँ.

नशा निगाहों का तेरी, क्या कहूँ,
देख कर उन्हें, बेसुधगी का पैमाना हुआ हूँ.

सवाल कई करते हैं मुझसे, इश्क से जुड़े,
मोहब्बत का मैं जैसे कोई ठिकाना हुआ हूँ.

फिरता हूँ जो अब गलियों में तेरी,
लोग कहते हैं आवारा बादल हुआ हूँ.

सच ही तो कहता हूँ मैं, नींद नहीं आती तुझे,
जब से आँखों का मैं तेरी काजल हुआ हूँ.

चाहे तू ना कहे, लेकिन मुझे खबर है,
दीवानगी का तेरी मैं आलम हुआ हूँ.
 
I wished to add something as "सावन हुआ हूँ..."  par kuchh likh nahi paya... :(

हे यकीन मुझे

हे यकीन मुझे, ये ज़माना भी देखेगा,
डूबा था ये सूरज कल जिधर,
उधर से ही कल फिर निकलेगा....

खुदा भी कब तक क्या करेगा,
नियति के नियम को
ये बंदा उसी का बदलेगा...

आग ये सीने में लगी रहती है....


चुभती है जो बातें लोगों की,
मुझे जीतने को मजबूर करती रहती हैं,
जीत जाना शामिल तो नहीं आदत में मेरी,
पर क्या करूँ जो आग ये सीने में लगी रहती है....


दुखी कोई आदतन नहीं होता...


कौन कहता है मुझे तेरे जाने का गम नहीं होता,
दुखी कोई शख्स आदतन नहीं होता...
धड़कता ये दिल तब भी है, मगर,
अंदाज़ धड़कने का रोज़ सा नहीं होता...

एक जान होने लगे हैं....

अरमान मोहब्बत में बढ़ने लगे हैं,
जज्बातों में हम पिघलने लगे हैं,
फासलें कम हो रहे हैं इस तरह,
दो जिस्म थे एक जान होने लगे हैं....





[image from flickr]

नयी ज़िन्दगी चाहिए ...

चंद लम्हे चाहिए तुझे अपना बनाने के लिए,
थोडा सा सुकून चाहिए तुझे पास बुलाने के लिए,
जुदा हो जाऊं तुझसे किस तरह,
एक नयी ज़िन्दगी चाहिए तुझे भुलाने के लिए.
हर लम्हे में ज़िन्दगी के
बस तुझे ही देखा है...
मैं नहीं जानता कब से, मगर,
दिल ये मेरा, तुझे अपना खुदा बना बैठा है...

I remember your words...

It wasn't my mistake,
but I remember your words.

I wasn't wrong at all,
but I remember your words.


You are a decent girl,
but I remember your words.

I am a decent boy,
but I remember your words.

I am sorry, you were hurt,
but I remember your words.

I forget often, 
but I remember your words.

I was quiet, I was hurt,
since then I remember your words.

घर अपना जन्नत सा लगता है...

छोटा सा ही सही,
घर अपना तो जन्नत सा लगता है.
दो कमरे, चार दीवारें हो चाहे तेरे लिए,
मेरे लिए तो यहाँ सारा जहां बसता है...

सूरज खिले चाहे कहीं से,
सवेरा मेरा तो इस दर से होता है.
दो चिरागों से ही रोशन सही,
घर मेरा किसी महफ़िल सा सजता है.

मंदिर - मस्ज़िद ना फिरूं चाहे,
आशीर्वाद तो सच्चा माँ-पिता से मिलता है.
कहूँ क्या मैं उस नन्ही परी से,
प्यार उससे तो दिल बेशुमार करता है.

छोटा सा ही सही,
घर अपना तो जन्नत सा लगता है.
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