अपनी एक रचना फ़िर से post कर रहा हूँ। चाहूँगा की आप इसे पढ़े। your views and suggestions are most welcome. :)
किसी से बात करूँ मैं
मेरा दिल करता नहीं ,
लिखूं भी तो क्या लिखूं,
अरमां कोई मचलता नहीं,
खामोश रहता हूँ अब मैं अक्सर ,
शोरगुल भी इस दुनिया का
मुझे तंग करता नहीं।
हैरान होता हूँ इन हर पल
बदलते चेहरों को देख कर,
जिन रास्तों पे घर हैं उनका
जो हकीक़त से नज़रें चुराते हैं,
उन गलियों से अब मैं गुज़रता नहीं,
खामोश रहता हूँ अब मैं अक्सर ,
शोरगुल भी इस दुनिया का
मुझे तंग करता नहीं।
सोचता हूँ किस तरह लोग
फरेबी बन जाते हैं,
झूठ को भी सच और
सच को भी झूठ बताते हैं ,
अब उनसे कोई सवालात मैं करता नहीं,
खामोश रहता हूँ अब मैं अक्सर,
शोरगुल भी इस दुनिया का
मुझे तंग करता नहीं।
खिलती सुबह ढलती शाम
की तरह तू मासूम है,
इठलाती घटाओं, लहराती हवाओं
की तरह तू बड़ी नादाँ है।
तारीफ़ क्या करूँ ज़माने से तेरी,
तू अपने आप में ही कुछ ख़ास है।
निघाहों में तेरी कशिश है अजब सी,
हंसीं तेरी एक प्यार भरा जाम है,
महकती है फ़िज़ायें साँसों से तेरी,
धड़कनें तेरी हर गीत का साज़ है।
तन्हाई में मेरी आज कल
बातें तेरी आम हैं,
हर लफ्ज़, हर दुआ में मेरी
बस एक तेरा ही नाम है।
खुशियाँ मिले ज़माने भर की तुझे,
खुश रहे तू उम्र भर,
बस यही एक ख्वाब, हसरत, फरियाद है।
ऐ यार मेरे, अब जुदा न होना, तू मुझसे,
इस पत-झड़ की तू ही एक बहार है....
की तरह तू मासूम है,
इठलाती घटाओं, लहराती हवाओं
की तरह तू बड़ी नादाँ है।
तारीफ़ क्या करूँ ज़माने से तेरी,
तू अपने आप में ही कुछ ख़ास है।
निघाहों में तेरी कशिश है अजब सी,
हंसीं तेरी एक प्यार भरा जाम है,
महकती है फ़िज़ायें साँसों से तेरी,
धड़कनें तेरी हर गीत का साज़ है।
तन्हाई में मेरी आज कल
बातें तेरी आम हैं,
हर लफ्ज़, हर दुआ में मेरी
बस एक तेरा ही नाम है।
खुशियाँ मिले ज़माने भर की तुझे,
खुश रहे तू उम्र भर,
बस यही एक ख्वाब, हसरत, फरियाद है।
ऐ यार मेरे, अब जुदा न होना, तू मुझसे,
इस पत-झड़ की तू ही एक बहार है....
हकीकत तो ग़लत फ़हमी सी हो गई है
मुझसे शायद कोई खता सी हो गई है,
खुशियाँ मेरी मुझसे खफा सी हो गई है।
जज़्बात भी साथ देते नहीं आज कल,
क्या ख़बर बहुत बड़ी भूल सी हो गई है।
रो देता हूँ अब महफिलों में भी अक्सर,
गम में डूब जाने की आदत सी हो गई है।
झूठे वादे ही मिले है अब तक मुझे,
हकीक़त तो ग़लत फ़हमी सी हो गई है।
दिलासे भी मिले मुफ्त में कई मुझे,
दुआ भी सब दिखावे सी हो गई है।
कोई रिश्ता न रहा यहाँ अब रिश्तों में,
साथ निभाने की बात बेमानी सी हो गई है।
मौत मिलती भी है तो यहाँ किश्तों में,
ज़िन्दगी किसी 'हादसे' की निशानी सी हो गई है।
दर्द झलकता नहीं है कभी इस तरह,
आज सब्र के बाँध की दीवारें टूट सी गई हैं।
खुशियाँ मेरी मुझसे खफा सी हो गई है।
जज़्बात भी साथ देते नहीं आज कल,
क्या ख़बर बहुत बड़ी भूल सी हो गई है।
रो देता हूँ अब महफिलों में भी अक्सर,
गम में डूब जाने की आदत सी हो गई है।
झूठे वादे ही मिले है अब तक मुझे,
हकीक़त तो ग़लत फ़हमी सी हो गई है।
दिलासे भी मिले मुफ्त में कई मुझे,
दुआ भी सब दिखावे सी हो गई है।
कोई रिश्ता न रहा यहाँ अब रिश्तों में,
साथ निभाने की बात बेमानी सी हो गई है।
मौत मिलती भी है तो यहाँ किश्तों में,
ज़िन्दगी किसी 'हादसे' की निशानी सी हो गई है।
दर्द झलकता नहीं है कभी इस तरह,
आज सब्र के बाँध की दीवारें टूट सी गई हैं।
मेरे अरमानों का घोडा :)
Posted by
Puneet Sahalot
on Friday, March 13, 2009
Labels:
My Drawings
/
Comments: (7)
My Cutie... Cutie... Lovely Sis... Mmmmuuuaaahhh... :))
Posted by
Puneet Sahalot
on Sunday, March 8, 2009
Labels:
My Drawings
/
Comments: (6)
'ज़िन्दगी' है मेरी
For my cutie lovely little sis...

उसे देख खुश होता था मैं,
आज उसके चश्मे को देख
उदास हो जाता हूँ मैं।
उसकी नादानियों, शैतानियों पे
मुस्कुराता था मैं,
आज चश्मे से उलझता देख उसे,
उदास हो जाता हूँ मैं।
हर वक्त भागती दौड़ती,
घर में सभी को हंसाती,
चश्मे के पीछे से देखे अब मुझे
तो उदास हो जाता हूँ मैं।
उसे देख नहीं सकता इस तरह,
ऐ खुदा इतनी सी रहमत कर दे,
खुशियाँ ले ले सारी तू मेरी,
उसे फ़िर से पहले जैसा कर दे,
अक्सर अकेले में रो जाता हूँ मैं।
नटखट, चंचल है वो,
क्या कहूँ कितनी प्यारी, मासूम है वो,
वो नन्हीं सी जान 'ज़िन्दगी' है मेरी,
उसी की दुआ में हाथ उठाता हूँ मैं।

उसे देख खुश होता था मैं,
आज उसके चश्मे को देख
उदास हो जाता हूँ मैं।
उसकी नादानियों, शैतानियों पे
मुस्कुराता था मैं,
आज चश्मे से उलझता देख उसे,
उदास हो जाता हूँ मैं।
हर वक्त भागती दौड़ती,
घर में सभी को हंसाती,
चश्मे के पीछे से देखे अब मुझे
तो उदास हो जाता हूँ मैं।
उसे देख नहीं सकता इस तरह,
ऐ खुदा इतनी सी रहमत कर दे,
खुशियाँ ले ले सारी तू मेरी,
उसे फ़िर से पहले जैसा कर दे,
अक्सर अकेले में रो जाता हूँ मैं।
नटखट, चंचल है वो,
क्या कहूँ कितनी प्यारी, मासूम है वो,
वो नन्हीं सी जान 'ज़िन्दगी' है मेरी,
उसी की दुआ में हाथ उठाता हूँ मैं।
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