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बस तुझे ही देखा है...

चाहा जिधर, उधर बस तुझे ही देखा है,
प्यार इतना जो आता है
तुझ पर, तो क्या मैं करूँ,
कहाँ तूने भी ख़ुद पर कोई काबू रखा है |

कभी दिल में छुपाता हूँ तुझे, 
कभी निगाहों ने मेरी 
ये मुझसे कहा है,
मैंने तुझे 'नज़र' बना रखा है | 


हसरतों का जहाँ तूने नहीं देखा,
चाहतें हैं कितनी,
कैसे बताता तुझे,
हर अरमान तो अभी दिल में दबा रखा है

कहानी ये कैसे बयां करूँ,
जो ख़त्म ना होती हो
उसे शुरू कहाँ से करूँ,
खुदा ने इसी का नाम तो 'मोहब्बत' रखा है |

जब ज़रूरत है...

जब ज़रूरत है कफन की
लोग चादर दीये जा रहे हैं |

क्या समझूँ मैं इसे,
वो जीने को कह रहे हैं मुझे,
या मेरी मौत का
मज़ाक बनाये जा रहें हैं....
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