Theme Preview Rss

Golden Jubilee of being a Poet.. :)

Well... here is my 50th poem on my BLOG... :) 

जो रातों को जागती है तू,
नींद आँखों को आती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

सोचती है क्या, जाने तू,
छुपाती है, बताती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

अकेले में ख़ुद से बतियाती है शायद,
तन्हा तू कभी रहती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

सोच - सोच मुझे, मुस्कुराती है,
याद मेरी जाती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

ख़ुद को निहारती है तू,
नज़रें आईने से अब हटती नहीं,इसकी कोई तो वजह होगी

सपने कितने सजाती है तू,
सितारों से कम नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।



4 comments:

QUIETUDE N said...

congrates!!

Priya Joyce said...

congozzzzzz n lovely template agn...:)

अभिन्न said...

Hi golden poet,
Many many congratulations on GOLDEN JUBILEE of being poet
.....
आप की कविताओं में एक विशिष्टता है ,एक प्रवाह है ऐसी कल्पना शील काव्य रचनाएँ बहुत कम लोग ही लिख पाते है पुनीत भाई आपकी शिकायत जायज है पर आपने मुझे याद दिला कर अपने आप को ओर भी अच्छा साबित कर दिया ...गर्व है हमे आप पर
कोई तो वजह होगी इस प्यार की
कोई तो वजह होगी
ओर वजह है 'की आप बहुत अच्छे इंसान हो
गोल्डन जुबिली मुबारकबाद हो

"अर्श" said...

kuchh to baat jarur hai koi naa koi to wajah hai hi main to pahele se hi kah rahaa hun tum maante hi nahi ... bahot bahot badhaayee ... aur haan niyamit nahi hun iske liye muaafi chaunga...


arsh

Related Posts Widget for Blogs by LinkWithin