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यूँ हस्ती मिटा कर ....

A ghazal by Prakash "Arsh" bhaiya... :)

मैं खुश हूँ उड़ा कर ।
यूँ हस्ती मिटा कर ॥

ये कैसे कहूँ मैं ,
हूँ जिंदा भुला कर ॥

वो आया नहीं क्यों ,
बता दो पता कर ॥

सुना फैसला अब ,
तू हां कर या ना कर ॥

मुझे उसने लूटा ,
पड़ोसी मिला कर ॥

लिखा है ये माँ ने ,
तू आजा खुदा कर

दुआ ज़िन्दगी की ,
हलाहल पिला कर ॥

वो बदनामी को भी ,
गया ले भुना कर ॥

करे अर्श अब क्या ,
वो बैठा है आ कर ॥


प्रकाश"अर्श"
http://prosingh.blogspot.com

1 comments:

Preetilata【ツ】 said...

bahut hi pyaari rachna thi yeh.
i liked it a lot.


thanks for visiting my blog and leaving behind those encouraging words.

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