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for a मस्त मौला friend.. :)) back again...

Prakash bhaiya ke kehne par unke liye fir se post kar raha hoon। :)

आँखें तेरी अनोखी अटखेलियाँ करती है,
लबों की हँसी में छुपी कोई हया सी लगती है।
कभी तू मासूम सी, कभी शरारती,
कभी बुद्धू ज़रा सी, कभी समझदार सी लगती है।

अचानक से किसी बात पर चौंक जाना,
कभी कभी थोड़ा सा सहम जाना तेरा,
परेशान भी हो तू कभी, तब भी,
हर हरकत तेरी अदा सी लगती है।

डरती है तू, कभी सबको डराती है,
(डरपोक no.1 ha..h.a...)
शरारत जो सूझे तुझे तो सताती है,
बातें अक्सर तेरी मन बहलाती है,
आवाज़ तेरी हर वक्त सुकून दे जाती है।

सोचते सोचते अंगुली को दातों के बीच दबाना,
खुश हो कर उछलना, गोल घूम जाना तेरा,
ऐसी ही बातें हैं कई और भी तुझमें ,
जो तू ज़माने से अलग सी नज़र आती है।

4 comments:

Priya Joyce said...

wah wah very beautifully written..re..kiske baare mei hei btw??:P

प्रकाश बादल said...

likhte raho! kahane vaalon ko kahne do. keep it up

प्रकाश बादल said...

likhte raho! kahane vaalon ko kahne do. keep it up

SWAPN said...

puneet achcha likh rahe ho, likhte raho, shubhkaamnayen.

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