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ख्वाहिशें

कुछ रुकी रुकी सी आवाजें हैं,
सुन ले तू मेरे बिन कहे,
बड़ी नहीं कोई,
छोटी छोटी सी मेरी ख्वाहिशें हैं।

सोचता हूँ कभी करीब हो तू मेरे,
मैं कहता रहूँ, तू सुनती रहे,
ज़रा ज़रा सा मुस्कुरा दे बातों पे मेरी,
ऐसी कुछ हसरतें हैं।

मैं चलूँ जो अलग तुझसे
तू साथ मेरे रहे,
दुनिया से अलग पहचाने मुझे,
ऐसी कुछ चाहतें हैं।

कभी बदला है तुने मुझे,
कभी सिखाया है कुछ,
गिर गिर कर जो उठा हूँ मैं,
सब तेरी इनायतें हैं।

इंतज़ार करता हूँ अक्सर मैं तेरा,
तू आएगी कभी,
पर आती मुझ तक सिर्फ़,
तेरे लौट जाने की आहटें हैं।

कभी पल भर की खुशी है मेरी,
कभी रुलाती तेरी यादें हैं,
ज़िन्दगी है यही,
पल पल में बदलती करवटें हैं।

5 comments:

SWAPN said...

kabhi pal ki khushi..........................

bahut khoob , puneet achcha likh rahe ho.

SWAPN said...

kabhi pal ki khushi..........................

bahut khoob , puneet achcha likh rahe ho.

अभिन्न said...

hi Punit how r u? first of all i sud say sorry for coming so late...dear brother 'meri saanse to vahin ki vahin atki hui thi aap aaye aur zinda kar diya" actually much busy in elections im busy since 2nd of march and shall b free after final counting.
very fine lines really appreciable
INTEZAR KARTA HOON AKSAR MAI TERA,
TU AAYEGI KABHI,
PAR AATI MUJH TAH SIRF
TERE LAUT JANE KI AAHTEN HAIN

LAGE RAHO....BAHUT ACHCHHA HAI

Babli said...

पहले तो मै आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हू कि आपको मेरी शायरी पसन्द आयी !
बहुत बढिया!! इसी तरह से लिखते रहिए !

प्रकाश बादल said...

वाह पुनीत वाह!:D मज़ा आगया लिखते रहो :P :P

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