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मेरी-तुम्हारी कोई तो कहानी है



मैं अक्सर सुनता हूँ, कि तुम ये कहती हो,
मेरी-तुम्हारी कोई तो कहानी है,
जो मोहब्बत कि है, तो छोटी सी है,
जुदाई के पल-पल में सदियाँ बितानी है।

मेरी सुकून की राहों से अक्सर तुम गुज़रती हो,
राहें ज़िन्दगी कि भी अब तुम्हारी है,
कट जाए ये सफर, कब क्या ख़बर,
अभी तो हर वक्त अजब सी खुमारी है।

तुम अक्सर मेरा इंतज़ार करती हो,
इसमे छुपी ज़रूर कोई बेकरारी है,
जो इंतज़ार है, बेकरारी है, खुमारी है,
तो यकीनन ये मोहब्बत की ही कहानी है।

4 comments:

SWAPN said...

तुम अक्सर मेरा इंतज़ार करती हो,
ये ज़रूर कोई बेकरारी है,
जो इंतज़ार है, बेकरारी है, खुमारी है,
तो यकीनन ये मोहब्बत की ही कहानी है।

achcha likh rahe ho likhte raho.

kaushal said...

tumne likhi kya khoob ye kahani hai
aisa lagta hai dil se nikli ye vani hai

Neha Maheshwari said...

bahut hi sunder rachna

प्रकाश बादल said...

बहुत खूब पुनीत भाई माफ करना काफी दिनों से आ नहीं पाया तुम्हारी कविता अच्छी लगी एक तो जगह वर्तनी की गलतियाँ है तलाश करो।

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