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आदत

कोशिश थी हवाओं की
हमें पत्तों की तरह उडाने की,
साजिश थी ज़माने की
हमें हर वक्त आजमाने की,
साथ किसी का मिल न सका कभी,
पर आदत हमारी थी हर बार जीत जाने की.

यकीन था ख़ुद पर,
कुछ कर गुजरने की ठानी थी,
दीवानगी जो थी मंजिल को पाने की,
उसे जूनून अपना बनाने की
आदत हमारी थी.

राह जो चुनी थी हमने अपनी,
हर मोड़ पर मिली मुश्किलों की सौगात थी,
हर छोर पर गुलशन खिला दिए हमने,
कांटो से भी यारी की,
आदत हमारी थी.

ढल चुका था सूरज,
अब चाँद से मुलाक़ात की बारी थी,
ख्वाब जो देखे थे इन बंद आंखों ने,
हकीक़त उन्हें बनाने की,
आदत हमारी थी.

9 comments:

अनुपम अग्रवाल said...

बेहतरीन संकल्प और हौसला
यकीनन मंज़िल ज़रूर मिलेगी

"SURE" said...

पुनीत जी क्षमा प्रार्थी हूँ की विलंब से आया हूँ .....पर आपका प्यार भरा संदेश पढ़ कर बहुत अच्छा लगा...... प्रिय बंधू ....और तुंरत एक छोटा सा प्रयास कर के छोटे भाई की इच्छा का ख्याल रखने की कोशिस की है जरुर पदियेगा ....इधर आया तो पाया के बहुत सुंदर सी रचना ने मेरा स्वागत किया ...
हर बार जीत जाने की कोशीस.... वाले ज़ज्बे को सलाम ....विजयी रहो प्रशन्न रहो.आपकी कविता में एक प्रेरक शक्ति मिलती है ....सुंदर और आदर्श लेखन के लिए बधाई

SWAPN said...

bahut sunder rachna puneet , badhai aise hi aur achcha likhte raho.

shyam kori 'uday' said...

...prasa^shaneeya rachanaa.

प्रकाश बादल said...

वाह पुनीत भाई बहुत अच्छा आप सही दिशा में जा रहे हो अच्छा लिख रहे हो।

saloni said...

aapki kavita bahut sundar hai.aap mere blog par aaye yah dekhkar man prasann ho gaya.aage bhi hamesha aapka swagat hai.aapka tahe dil se shukriya.

Krishna Patel said...

waah!kya baat hai.adbhut.

गौतम राजरिशी said...

अच्छे खयालों का बड़ा अच्छा शब्द-संयोजन है...
बहुत बढ़िया....

QUIETUDE N said...

u write amazingly well....this hindi peom is an exceptionally well expressed and written.

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