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उम्मीदों के सहारे....

उम्मीदों के सहारे जी रहा हूँ आज,
कल उम्मीदों को मेरा सहारा होगा...

(आएगा कोई शख्स किसी दुनिया से,
जो सिर्फ़ हमारा होगा...)

3 comments:

विनय said...

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

-----नयी प्रविष्टि
आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

"अर्श" said...

bahot khub likha hai ..magar itani si umra me ya kya likh rahe ho ????..nazm ke liye vinay bhai ko padho sikh jawoge....

QUIETUDE N said...

truly said...

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