कब दिल मेरा तेरा गुलाम नहीं होता
तुझे शायद ख़बर भी ना होगी,
गौर से सुनना कभी हर धड़कन तेरी
मुझ ही को पुकारती होगी।
निघाहें तेरी कहती है,
अजनबी सी पेश आए तो वो तेरी अदा होगी,
जो देख कर मुझे नज़रें चुराए,
तो अकेले में मुस्कुराती होगी।
दुआओं में मेरी असर है इतना,
हर ख्वाहिश तेरी पूरी होगी,
जो टूटे कोई ख्वाब तो मुझसे कहना,
दामन में तेरे खुशियाँ बेशुमार होगी।
तुझे सोचता हूँ हर लम्हा,
मुमकिन है की तुझे भी मेरी ज़रूरत होगी,
जो रह न सके तू पल भर भी तन्हा,
तो यकीनन तेरी मेरी ज़िन्दगी एक होगी।
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5 comments:
भई वाह क्या ख़ूबसूरत कविता है
आपने मुझसे पूछा था कि नज़्म कैसे लिखें देर से उत्तर दे रहा हूँ क्षमा चाहूँगा कहीं आपने मुझे घमंडी तो नहीं समझा, ज़रा व्यस्त था, नज़्म उर्दू शायरी की मुक्त कविता है जिसमें अस्लूब से ज़्यादा भाव और कहने का ढंग देखा जाता है
---आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें
likhte raho. sunder kavita.
Bhot acche bhav puneet ji bhot sunder likh rahe hain aap likhte rahen....
अच्छी नज़्म है ....
ईमानदारी से और मन की गहराई से लिखी गयी है ....
भाव समझ में आते हैं,
कोशिशें ज़रूर सफल होती हैं, लिखते रहिये .....
---मुफलिस---
बहुत खूब आगे बढ़ो बधाई।
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