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तुझे मेरी ज़रूरत होगी

जब आँखें तेरी नम होगी,
जिस दिन हँसी भी लबों से गुम होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब दर्द उठेगा दिल में तेरे,
जिस दिन पलकें तेरी भीगी होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब गुलशन भी खफा होंगे तुझसे,
जिस दिन मौसम की बेरुखी होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब ख्वाब कोई टूटेगा तेरा,
जिस दिन ज़माने भर की आंधियां होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब कभी किस्मत भी तेरी धोखा देगी तुझे,
जिस दिन यकीन भी न होगा तुझे ख़ुद पे,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब खुदा भी साथ न होगा तेरे,
जिस दिन किसी अपने की कमी महसूस होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

4 comments:

"SURE" said...

पुनीत जी आप की रचनाये पढ़ते हुए लगता है की कोई बहुत बड़ी उम्र का कवि लिख रहा है
आपकी ये रचना पढ़ कर अनायास ही ये बोल मेरी जुबान पर आ गए किसी गीत के :
जब कोई बात बिगड़ जाये जब कोई मुश्किल आ जाये
तुम देना साथ मेरा ओ हमनावाज़
.......बहुत बहुत प्यार ओर सुभकामनाएँ

SWAPN said...

viyogi hoga pahla kavi, aah se ubhra hoga gaan
nikalkar nayanon se chupchaap bahi hogi kavita anjaan, badhaai

Puneet Sahalot said...

"SURE" ji or "SWAPN" ji aapka bahut bahut dhanyawad blog padhne k liye or aapki tippaniyo k liye...
koshish karunga ki isi tarah aap sabhi se seekhta rahu or isi tarah kuchh likhta rahu. :)

Puneet Sahalot

प्रकाश बादल said...

भाई पुनीत
तुम्हारा ब्लॉग देखा और तुम्हारी वैबसाईट भी, इतनी छोटी उम्र में तुम जो लिख रहे हो और जो तुम्हारा उत्साह है उसकी पीठ थपथपाना बहुत लाज़मी है। तुम्हारी कविताएं बहुत अच्छी है
मैं तुम्हें एक सलाह देना चाहता हूँ अगर तुम हिन्दी साहित्य को पढने में भी रुचि दिखाओगे तो देखना कुछ ही दिनों में तुम्हारी कविताएँ बड़े-बड़ों को टक्कर देने वाली है। दरअसल आज के दौर में सबसे बड़ी विडम्बना ये है कि हम दूसरों को नहीं पढ़ते. इसी कारण हमारा लेखन आगे नहीं बढ़ता\ तुम में जो ऊर्जा है उसको ध्यान में रखते हुए मैं विश्वास करता हूँ कि तुम मेरी सलाह को गंभीरता से लोगे और भविष्य में तुम्हारी कविताएँ और निखर कर आएँगी तो मुझे बेहद खुशी होगी। तुम अगर हिन्दी साहित्य में रुचि रखते हो तो कविता कोश डॉट ओर आर जी साईट पर जा कर देख सकते हो वहाँ पर तुम्हें हज़ारों हिन्दी के साहित्यकार मिल जाएँगे और तुम उनकी रचनाएँ (जब भी पढ़ो) पढ़्कर और प्रेरित हो सकते हो और तुम्हारे भीतर मैं जो धार देख रहा हूँ वो और पैनी हो जाएगी ये मेरा पूरा विश्वास है। और रही मेरी बात मैं तो तुन्हारी फैन हो ही गया।

जीओ!

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