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ये शहर....


जीती जागती ज़िन्दगी को दफनाता ये शहर,
हर मुफलिस को अमीरी के ख्वाब दिखाता ये शहर.

हकीक़त से कोसों दूर है गलियाँ इसकी,
हर किसी को उम्मीदों के पुल बंधाता ये शहर.

न उगते सूरज की परवाह इसे, न ढलती शाम की,
अंधेरे उजालों, उजालों अंधेरों में भागता ये शहर.

चीखुं, चिल्लाऊं, कहानी किसे अपनी सुनाऊं,
भीड़ में गुमनाम बनाता ये शहर.

ऊँची - ऊँची इमारतों के बीच,
दिल के रास्तों को तंग बनाता ये शहर.

ना पडौस यहाँ पे , ना कोई चबूतरा,
गाँव की याद में हर वक्त रुलाता ये शहर.

ना कोई गली अपनी, ना कोई मौहल्ला,
केवल सड़कों से मुलाकात करवाता ये शहर.

ना चाची की डांट यहाँ पे, ना बच्चों की शैतानी,
हर पल प्यार के लिए तरसाता ये शहर.

बेहतर ज़िन्दगी की तलाश में आता है हर शख्स,
जीती जागती ज़िन्दगी को दफनाता ये शहर.

बस तुझे ही देखा है...

चाहा जिधर, उधर बस तुझे ही देखा है,
प्यार इतना जो आता है
तुझ पर, तो क्या मैं करूँ,
कहाँ तूने भी ख़ुद पर कोई काबू रखा है |

कभी दिल में छुपाता हूँ तुझे, 
कभी निगाहों ने मेरी 
ये मुझसे कहा है,
मैंने तुझे 'नज़र' बना रखा है | 


हसरतों का जहाँ तूने नहीं देखा,
चाहतें हैं कितनी,
कैसे बताता तुझे,
हर अरमान तो अभी दिल में दबा रखा है

कहानी ये कैसे बयां करूँ,
जो ख़त्म ना होती हो
उसे शुरू कहाँ से करूँ,
खुदा ने इसी का नाम तो 'मोहब्बत' रखा है |

जब ज़रूरत है...

जब ज़रूरत है कफन की
लोग चादर दीये जा रहे हैं |

क्या समझूँ मैं इसे,
वो जीने को कह रहे हैं मुझे,
या मेरी मौत का
मज़ाक बनाये जा रहें हैं....

सफर ये आखिरी और पहला हो

हाथों में हाथ,
संग मैं चलूँ तेरे,
सफर ये कभी ख़त्म ना हो।
ना मैं रुकूँ,
रुके ना तू,
बस खामोशी, बातों,
वादों का सिलसिला हो।

संग तू और मैं चलते रहें,
फ़िर चाहे शाम ढले,
या सवेरा खिले,
देखे चन्दा हमें,
या देख हमें सूरज जले,
हमें किसी की परवाह न हो।

संग तू और मैं चलें कुछ इस तरह,
सफर ये आखिरी और पहला हो।

किसी से शिकायत क्या करूँ..

किसी से शिकायत क्या करू मैं
मुझे तो अपनों ने ही धोखा दिया,
दुआ करता रहा सबकी खुशियों की मैं,
शायद मैंने यही गुनाह किया.....

:(

The day is not fine

I wrote these lines when my friend called me up and said that her father was not well, she seemed to be very much tensed. I wasn't able to say anything except for "don't worry everything will be fine" and then I sent her a message reading :

" The day is not fine,
but I have faith with me,
everything will be back to,
as it used to be,
The day is not fine,
but I have faith with me..."

I think only thing which could help us face such tough situations is "faith". Faith in the almighty becomes the superpower at such times.

Golden Jubilee of being a Poet.. :)

Well... here is my 50th poem on my BLOG... :) 

जो रातों को जागती है तू,
नींद आँखों को आती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

सोचती है क्या, जाने तू,
छुपाती है, बताती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

अकेले में ख़ुद से बतियाती है शायद,
तन्हा तू कभी रहती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

सोच - सोच मुझे, मुस्कुराती है,
याद मेरी जाती नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।

ख़ुद को निहारती है तू,
नज़रें आईने से अब हटती नहीं,इसकी कोई तो वजह होगी

सपने कितने सजाती है तू,
सितारों से कम नहीं,
इसकी कोई तो वजह होगी।



यूँ हस्ती मिटा कर ....

A ghazal by Prakash "Arsh" bhaiya... :)

मैं खुश हूँ उड़ा कर ।
यूँ हस्ती मिटा कर ॥

ये कैसे कहूँ मैं ,
हूँ जिंदा भुला कर ॥

वो आया नहीं क्यों ,
बता दो पता कर ॥

सुना फैसला अब ,
तू हां कर या ना कर ॥

मुझे उसने लूटा ,
पड़ोसी मिला कर ॥

लिखा है ये माँ ने ,
तू आजा खुदा कर

दुआ ज़िन्दगी की ,
हलाहल पिला कर ॥

वो बदनामी को भी ,
गया ले भुना कर ॥

करे अर्श अब क्या ,
वो बैठा है आ कर ॥


प्रकाश"अर्श"
http://prosingh.blogspot.com

Father's Day Special :)

Here is a poem by renowned poet of our country Mr. Om Vyas. I like this poem a lot. I request you to read this one and post your comments.
पिता…पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,
पिता…पिता सृष्टी मे निर्माण की अभिव्यक्ती है,
पिता अँगुली पकडे बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है,
पिता…पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता…पिता धौंस से चलना वाला प्रेम का प्रशासन है,
पिता…पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,
पिता…पिता छोटे से परिंदे का बडा आसमान है,
पिता…पिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं,
पिता से परिवार में प्रतिपल राग है,
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है,
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ती है,
पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिती की भक्ती है,
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ती है,
पिता…पिता रक्त निगले हुए संस्कारों की मूर्ती है,
पिता…पिता एक जीवन को जीवन का दान है,
पिता…पिता दुनिया दिखाने का एहसान है,
पिता…पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
तो पिता से बडा तुम अपना नाम करो,
पिता का अपमान नहीं उनपर अभिमान करो,
क्योंकि माँ-बाप की कमी को कोई बाँट नहीं सकता,
और ईश्वर भी इनके आशिषों को काट नहीं सकता,
विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है,
माँ-बाप की सेवा ही सबसे बडी पूजा है,
विश्व में किसी भी तिर्थ की यात्रा व्यर्थ हैं,
यदि बेटे के होते माँ-बाप असमर्थ हैं,
वो खुशनसीब हैं माँ-बाप जिनके साथ होते हैं,
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं।
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं।

- ओम व्यास

The Conclusion


A few days back I thought of putting a Pause to blogging till my exams get over. But last 2-3 days had been full of surprises for me. Somethings never told, somethings never being understood, somethings unspoken.... were discussed in these days. I was overwhelmed with emotions. Thought of everything right from the bottom of my heart. And what finally came up was a Conclusion. A Conclusion very much important for the life ahead but that too with a fear of a loss. A fear of loss, coz no one can predict the future or no one can assure himself/herself about his/her future. There cant be a solution to this problem, only thing we can do is live in present neither looking back to the past nor looking forward to the days to come. Everything is planned, I say. And whatever happens is for good, I believe.

In these last 2-3 days I felt as if sometimes we are afraid of ourselves, afraid of what others would say, afraid of losing whatever we possess, we have achieved or someone whom we say is 'Ours/Mine'. A fear always resides inside us, that fear is always unspoken. Its only for people to understand. And sometimes our near and dear ones help us overcome this fear.

At last, I would say I don't know actually what I have written. I haven't designed a plot for writing all this. But, everything written here is what I feel is a general experience of our day to day life.

The conclusion was: A fear of losing what we have always resides inside us. And someday you would find a person who would help you overcome all these fears. That person could be YOU or someone else.

Here are a few lines from 'The Alchemist': (The only Novel which I have read till date... :))
"We all are afraid of losing what we have, whether its our life or property or possessions and property. But this fear evaporates when we understand that our life stories and the history of world are written by the same hand."

A 'Dream' was I

Life is full of surprises... no one knows wats goin to happen nxt... n most of the time u dont even get a chance to prepare urself for wat has happend... some surprises are better called as 'SHOCKS...!!' thats wat v cl life... it has to be, as it is...

A true friend was I,
Dreams had I,
Dreams in my eyes,
Dreams of your eyes,
Dreams of being with you,
Dreams of being close to you,
Dreams of loving you,
Dreams of living a life,
Dreams, Dreams, Dreams,
Numerous Dreams had I,
A true friend was lost,
A true friend was left behind,
A true friend was I,
It wasn't a dream,
It became a dream then,
In the daylight,
A 'Dream' was I....

SOMETHING INTERESTING:
At 12hr 34 minutes and 56 seconds on the 7th of August this year, the time and date will be

12:34:56 07/08/09


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This will never happen in your life again

आई हो जब से तुम

can't resist much... so m back... :)

आई हो जब से तुम ज़िन्दगी में मेरी,
जहां मेरा जन्नत हो रहा है।
क्या कहूँ तुमसे, कि किस कदर,
दिल ये पागल हो रहा है।

बहकता है कभी, कभी मचलता है,
ठिठक - ठिठक कर चलता है,
मिली हो जो तुम इसे, इस तरह,
ख़ुद पर गुमान सा हो रहा है।

बावरा हो गया है ये आजकल,
कभी फलक पर नाम तुम्हारा,
कभी रातों में तुम्हें चाँद सा लिख रहा है।

अरमान इसके जानूं ना मैं,
जज्बातों का कहाँ कोई ठिकाना है,
बच कर रहना इससे तुम ज़रा,
निगाहों में तुम्हारी इसे,
मयखाना दिख रहा है।

सुरूर मोहब्बत का
चढ़ रहा है अभी - अभी,
होश धीरे - धीरे गुम हो रहा है,
क्या कहूँ तुमसे, कि किस कदर,
दिल ये पागल हो रहा है।

ज़माने सा बनाया होता मुझे


ऐ खुदा मेरे क्यों नासमझ बनाया तुने मुझे,
थोडी सी दुनियादारी भी सिखा जाता मुझे।

थोड़ा बेईमान, मक्कार, एहसान फरामोश बना कर,
दुनिया की नज़रों में उठा कर,
इस ज़माने सा बनाया होता मुझे।

किस तरह शब्दों को गुंथा जाता है,
बातों से दिल लोगों का लूटा जाता है,
ऐसा कोई हुनर सिखाया होता मुझे।

सच बोलना तो आता है मुझे,
झूठ किस तरह छुपाया जाता है,
कोई बहाना बताया होता मुझे।

कई होते मुझ पर भी फ़िदा,
जी न सकते कभी वो मेरे बिना,
रिश्तों से खेलना सिखाया होता मुझे।

इंसान बना दिया मुझे तुने,
थोड़ा झूठा, फरेबी, आदमी सा बनाया होता मुझे,
कोई शिकायत न होती मुझे तुझसे,
जो औरों सा बनाया होता मुझे।

har insaan me kuch na kuch kami zarur hoti hai... bt M not that bad yaar... :)

Bye to all.... n my blog....
Wish u all loads of happiness n success... :))

Regards
Puneet Sahalot...

ख्वाहिशें

कुछ रुकी रुकी सी आवाजें हैं,
सुन ले तू मेरे बिन कहे,
बड़ी नहीं कोई,
छोटी छोटी सी मेरी ख्वाहिशें हैं।

सोचता हूँ कभी करीब हो तू मेरे,
मैं कहता रहूँ, तू सुनती रहे,
ज़रा ज़रा सा मुस्कुरा दे बातों पे मेरी,
ऐसी कुछ हसरतें हैं।

मैं चलूँ जो अलग तुझसे
तू साथ मेरे रहे,
दुनिया से अलग पहचाने मुझे,
ऐसी कुछ चाहतें हैं।

कभी बदला है तुने मुझे,
कभी सिखाया है कुछ,
गिर गिर कर जो उठा हूँ मैं,
सब तेरी इनायतें हैं।

इंतज़ार करता हूँ अक्सर मैं तेरा,
तू आएगी कभी,
पर आती मुझ तक सिर्फ़,
तेरे लौट जाने की आहटें हैं।

कभी पल भर की खुशी है मेरी,
कभी रुलाती तेरी यादें हैं,
ज़िन्दगी है यही,
पल पल में बदलती करवटें हैं।

My Graphichs Designing

Click the image to view full size Poster.

जाने क्या सोच रही थी

आज वो कुछ

ख़ुद में ही खोयी हुई सी थी,

खामोश सी थी, बैठी चुपचाप,

जाने क्या सोच रही थी,

पर आज वो,

हर रोज़ से भी ज़्यादा

खुबसूरत लग रही थी।


बैठी थी वो नज़रें झुकाए,

शायद कोई ख्वाब बुन रही थी,

कुछ हसीं पल के,

आने वाले कल के,

जाने क्या सोच रही थी,

पर आज वो,

हर रोज़ से भी ज़्यादा

खुबसूरत लग रही थी।


मैं एक टक देख रहा था उसे,

वो ज़मीन को देख रही थी,

सितारों को छूने की सोच रही थी,

कोई ख्वाहिश दबी,

जैसे उठ रही थी,

जाने क्या सोच रही थी,

पर आज वो,

हर रोज़ से भी ज़्यादा

खुबसूरत लग रही थी।


ज़माने सा बनाया होता मुझे

ऐ खुदा मेरे क्यों नासमझ बनाया तुने मुझे,
थोडी सी दुनियादारी भी सिखा जाता मुझे।

थोड़ा बेईमान, मक्कार, एहसान फरामोश बना कर,
दुनिया की नज़रों में उठा कर,
इस ज़माने सा बनाया होता मुझे।

किस तरह शब्दों को गुंथा जाता है,
बातों से दिल लोगों का लूटा जाता है,
ऐसा कोई हुनर सिखाया होता मुझे।

सच बोलना तो आता है मुझे,
झूठ किस तरह छुपाया जाता है,
कोई बहाना बताया होता मुझे।

कई होते मुझ पर भी फ़िदा,
जी न सकते कभी वो मेरे बिना,
रिश्तों से खेलना सिखाया होता मुझे।

इंसान बना दिया मुझे तुने,
थोड़ा झूठा, फरेबी, आदमी सा बनाया होता मुझे,
कोई शिकायत न होती मुझे तुझसे,
जो औरों सा बनाया होता मुझे।

मेरी-तुम्हारी कोई तो कहानी है



मैं अक्सर सुनता हूँ, कि तुम ये कहती हो,
मेरी-तुम्हारी कोई तो कहानी है,
जो मोहब्बत कि है, तो छोटी सी है,
जुदाई के पल-पल में सदियाँ बितानी है।

मेरी सुकून की राहों से अक्सर तुम गुज़रती हो,
राहें ज़िन्दगी कि भी अब तुम्हारी है,
कट जाए ये सफर, कब क्या ख़बर,
अभी तो हर वक्त अजब सी खुमारी है।

तुम अक्सर मेरा इंतज़ार करती हो,
इसमे छुपी ज़रूर कोई बेकरारी है,
जो इंतज़ार है, बेकरारी है, खुमारी है,
तो यकीनन ये मोहब्बत की ही कहानी है।

ये शहर

जीती जागती ज़िन्दगी को दफनाता ये शहर,
हर मुफलिस को अमीरी के ख्वाब दिखाता ये शहर.

हकीक़त से कोसों दूर है गलियाँ इसकी,
हर किसी को उम्मीदों के पुल बंधाता ये शहर.

न उगते सूरज की परवाह इसे, न ढलती शाम की,
अंधेरे उजालों, उजालों अंधेरों में भागता ये शहर.

चीखुं, चिल्लाऊं, कहानी किसे अपनी सुनाऊं,
भीड़ में गुमनाम बनाता ये शहर.

ऊँची - ऊँची इमारतों के बीच,
दिल के रास्तों को तंग बनाता ये शहर.

ना पडौस यहाँ पे , ना कोई चबूतरा,
गाँव की याद में हर वक्त रुलाता ये शहर.

ना कोई गली अपनी, ना कोई मौहल्ला,
केवल सड़कों से मुलाकात करवाता ये शहर.

ना चाची की डांट यहाँ पे, ना बच्चों की शैतानी,
हर पल प्यार के लिए तरसाता ये शहर.

बेहतर ज़िन्दगी की तलाश में आता है हर शख्स,
जीती जागती ज़िन्दगी को दफनाता ये शहर.

ज़िन्दगी है यही कि जीता रहूँ

ज़िन्दगी है यही कि जीता रहूँ,
मरने से पहले,
शायद पूरे कभी कोई अरमान होंगे।

चुरा लाया हूँ खुशियाँ थोडी सी
जाने कहीं से,
पर कहाँ उनमें कोई जज़्बात होंगे।

उलझा हूँ इधर उधर की उलझनों में ,
कभी सुलझ जाए,
तो ज़िन्दगी के साज़ होंगे।

बात मेरी भी सुने कोई,
ज़रा सी है,
लफ्ज़ मेरे कोई इस लायक तो होंगे।

बडबडाता हूँ अक्सर अकेले मैं,
उम्मीद है मुझे,
ये खामोशियों को तोड़ते होंगे।

रुख दिख गया है हवाओं का,
अभी से मुझे,
रास्ते अपने मुझे बदलने होंगे।

चलना है अब सिर्फ़ मुझे ही मुझे,
राहों में मेरी,
किन्हीं क़दमों के निशां भी ना होंगे।

साथ निभाना न आए किसी को,
पर यकीनन कभी,
साथ छोड़ने में कोई मजबूर न होंगे।

खामोश रहता हूँ



किसी से बात करूँ मैं
मेरा दिल करता नहीं ,
लिखूं भी तो क्या लिखूं,
अरमां कोई मचलता नहीं,
खामोश रहता हूँ अब मैं अक्सर ,
शोरगुल भी इस दुनिया का
मुझे तंग करता नहीं।


हैरान होता हूँ इन हर पल
बदलते चेहरों को देख कर,
जिन रास्तों पे घर हैं उनका
जो हकीक़त से नज़रें चुराते हैं,
उन गलियों से अब मैं गुज़रता नहीं,
खामोश रहता हूँ अब मैं अक्सर ,
शोरगुल भी इस दुनिया का
मुझे तंग करता नहीं।


सोचता हूँ किस तरह लोग
फरेबी बन जाते हैं,
झूठ को भी सच और
सच को भी झूठ बताते हैं ,
अब उनसे कोई सवालात मैं करता नहीं,
खामोश रहता हूँ अब मैं अक्सर,
शोरगुल भी इस दुनिया का
मुझे तंग करता नहीं।
खिलती सुबह ढलती शाम
की तरह तू मासूम है,
इठलाती घटाओं, लहराती हवाओं
की तरह तू बड़ी नादाँ है।
तारीफ़ क्या करूँ ज़माने से तेरी,
तू अपने आप में ही कुछ ख़ास है।

निघाहों में तेरी कशिश है अजब सी,
हंसीं तेरी एक प्यार भरा जाम है,
महकती है फ़िज़ायें साँसों से तेरी,
धड़कनें तेरी हर गीत का साज़ है।

तन्हाई में मेरी आज कल
बातें तेरी आम हैं,
हर लफ्ज़, हर दुआ में मेरी
बस एक तेरा ही नाम है।

खुशियाँ मिले ज़माने भर की तुझे,
खुश रहे तू उम्र भर,
बस यही एक ख्वाब, हसरत, फरियाद है।

ऐ यार मेरे, अब जुदा न होना, तू मुझसे,
इस पत-झड़ की तू ही एक बहार है....

हकीकत तो ग़लत फ़हमी सी हो गई है

मुझसे शायद कोई खता सी हो गई है,
खुशियाँ मेरी मुझसे खफा सी हो गई है।

जज़्बात भी साथ देते नहीं आज कल,
क्या ख़बर बहुत बड़ी भूल सी हो गई है।

रो देता हूँ अब महफिलों में भी अक्सर,
गम में डूब जाने की आदत सी हो गई है।

झूठे वादे ही मिले है अब तक मुझे,
हकीक़त तो ग़लत फ़हमी सी हो गई है।

दिलासे भी मिले मुफ्त में कई मुझे,
दुआ भी सब दिखावे सी हो गई है।

कोई रिश्ता न रहा यहाँ अब रिश्तों में,
साथ निभाने की बात बेमानी सी हो गई है।

मौत मिलती भी है तो यहाँ किश्तों में,
ज़िन्दगी किसी 'हादसे' की निशानी सी हो गई है।

दर्द झलकता नहीं है कभी इस तरह,
आज सब्र के बाँध की दीवारें टूट सी गई हैं।

मेरे अरमानों का घोडा :)

कई दिनों से कुछ लिखा नहीं तो सोचा अपने अरमानो के घोडे को ही थोडा उड़ने दूँ और जब उसने उड़ना शुरू किया तो उड़ते - उड़ते यहाँ पहुँच कर यहीं पर चिपक गया... :))

तसवीरें भी तेरी बोलती हैं आजकल

मोहब्बत में तेरी डूब गया हूँ इतना कि,
तसवीरें भी तेरी बोलती हैं आजकल

बैठे बैठे बतियाता हूँ उन्हीं से कि,
तुझे सोच सोच पगलाता हूँ आजकल

रह रहा हूँ मैं यादों में तेरी कि,
रह रही है तू मुझ में आजकल

मैं मानूं ये सौगातें है तेरी कि,
सब कुछ तेरा हो गया है आजकल

बहुत ख़ूबसूरत है तू, जानती है तू,
पर सब से कह रहा हूँ मैं आजकल

दीवाना बन फिरता हूँ इधर उधर,
कहते हैं सभी बावरा हो गया हूँ आजकल

खुशियों का मेरी एक ही ठिकाना है अब,
गलियों से तेरी बार बार गुज़रता हूँ आजकल

दिल नादाँ मेरा बहक गया है इस तरह कि ,
अक्स में भी अपने तुझे ही देखता हूँ आजकल

मोहब्बत में तेरी डूब गया हूँ इतना कि,
तसवीरें भी तेरी बोलती हैं आजकल।

खफा हम भी होते तो हैं


"खफा हम भी होते तो हैं" पर आज खफा नहीं आज खुश हूँ। ये मेरी 50th पोस्ट है मेरे ब्लॉग पर।
Golden Jubilee मना रहा हूँ आज... :)

बात यह है कि हम तुमसे कहते नहीं,

वरना खफा हम भी कभी होते तो हैं।


उठता नहीं धुंआ, ना राख ही बचती है ,

जज़्बात इस दिल के भी जलते तो हैं।


रोके रखते हैं ख़ुद को हम हर दफा,

पर अरमान कई मचलते तो हैं।


माना बहाने बेशुमार हैं पास तुम्हारे,

दूर जाने से पहले कदम रुकते तो हैं।


अब वादों की फितरत हम क्या कहें,

एक बार बनकर कई बार टूटते तो हैं।


ऐसा नहीं की अकेले हो तुम ही अकेले,

तन्हाई को हम भी महसूस करते तो हैं।


बात ये है की हम तुमसे कहते नहीं,

यादों में तुम्हारी अक्सर हम भी रोते तो हैं।


आदत

कोशिश थी हवाओं की
हमें पत्तों की तरह उडाने की,
साजिश थी ज़माने की
हमें हर वक्त आजमाने की,
साथ किसी का मिल न सका कभी,
पर आदत हमारी थी हर बार जीत जाने की.

यकीन था ख़ुद पर,
कुछ कर गुजरने की ठानी थी,
दीवानगी जो थी मंजिल को पाने की,
उसे जूनून अपना बनाने की
आदत हमारी थी.

राह जो चुनी थी हमने अपनी,
हर मोड़ पर मिली मुश्किलों की सौगात थी,
हर छोर पर गुलशन खिला दिए हमने,
कांटो से भी यारी की,
आदत हमारी थी.

ढल चुका था सूरज,
अब चाँद से मुलाक़ात की बारी थी,
ख्वाब जो देखे थे इन बंद आंखों ने,
हकीक़त उन्हें बनाने की,
आदत हमारी थी.

मंज़र बदल गया है कोई...

ये मेरे जज़्बात हैं,
इन्हें पढ़ गया है कोई,
कोई आया था यहाँ चुपके से,
क़दमों के निशाँ इस दिल पे,
छोड़ गया है कोई।

अजनबी था वो कोई,
अपना बना गया है कोई,
आहें उठा करती थी कभी,
अब धड़कनें दे गया है कोई

आसुओं को बारिश बना गया है कोई,
बंज़र ज़िन्दगी का मंज़र बदल गया है कोई,
खुश्क होती थी धड़कनें सभी,
अब उन्हें खुश कर गया है कोई

सासों को सात सुरों में पिरो गया है कोई,
जज्बातों को आवाज़ बना गया है कोई,
उठती गिरती नज़्म होती थी अक्सर,
उन्हें संभालने को लफ्ज़ दे गया है कोई

वो आहटें थी उसके आने की या,
जाते-जाते दुआएं दे गया है कोई,
वो निशाँ क़दमों के निशानी थी उसकी या,
मंजिल की राहें बता गया है कोई

रुका ना वो मेरे लिए,
वादा भी ना किया कोई,
पढ़कर जज़्बात मेरे,
मंज़र ज़िन्दगी का बदल गया है कोई

Sweeet Friends...

I wish I had a friend like this one....

Mother's love

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ज़िन्दगी 'ज़िन्दगी' होती जाए


खामोशी को मेरी समझे गर ,
तो कहूँ तुझसे मोहब्बत है,
जो निगाहों से कह जाए,
तो कहूँ ज़िन्दगी 'ज़िन्दगी' होती जाए।

बात जो करे गर तो
धड़कनें ख़ुद खामोश हो
तुझे सुनने को बेताब नज़र आयें,
तू जो देखे मुझे गर
तो कहूँ ज़िन्दगी 'ज़िन्दगी' होती जाए।

खिलती धूप में ढूँढूं तुझे
या चांदनी रात में तू मिल जाए,
हाथों में हाथ चलूँ मैं,
तो कहूँ ज़िन्दगी 'ज़िन्दगी' होती जाए.

हवाओं से कह दूँ मैं,
जुल्फों को तेरी न छेड़े यूँ,
जो सवारूँ मैं उन्हें,
तो कहूँ ज़िन्दगी 'ज़िन्दगी' होती जाए।

ओस की बूंदें भी अब तो
बारिशों सा खुबसूरत एहसास दे जाए,
पत्तो की सर-सराहट सी आहटें हो तेरी
तो कहूँ ज़िन्दगी 'ज़िन्दगी' होती जाए।

तेरा साथ मिल जाए गर मुझे
तो कहूँ ज़िन्दगी 'ज़िन्दगी' हो जाए।

ज़रूरत थी जब किसी अपने की...




ज़रूरत थी जब किसी अपने की
मैं खुदा को ढूंढ़ लाया,
तलाश थी मोहब्बत के काफिलों की
ना जाने कहाँ से वो बेवफा चला आया।

झूठे वादे कहीं से ,
कहीं से सिर्फ़ झूठे दिलासे ले आया ,
गया जहाँ कहीं भी, हर दफा,
किसी दगाबाज़ से मिल आया ।

आदत बड़ी बुरी थी यारों,
खुद्दारी से जीने की,
जब कभी बिकता ईमान देखा
तो परदे गिरा आया।

साथ मिलना किसी का तो
नामुमकीन सी बात थी,
मैं अकेला ही हर जंग जीत आया।

हँसते चेहरों के पीछे क्या है,
पता था मुझे,
उन्हें भी मैं हकीक़त के आईने दिखा आया।

गिरा जब कभी किसी का सहारा ना था,
चंद इमारतें क्या खड़ी हुई अमीरी की,
हर कोई दौडा चला आया ।

पैसे को पूछती है दुनिया,
पैसे को पूजती है दुनिया,
कल तक किनारा कर गुज़रता था वो,
आज वो भी अपना बन चला आया।

ज़िन्दगी को देखा है मैंने हर नज़रिए से,
मेरे बुरे दिनों को भुलाकर हर कोई
आज अच्छे दिनों में साथ निभाने चला आया।
अपनेपन का ताज पहने सर पे,
कोई मुझे 'भाई' तो कोई 'बेटा'
और पता नहीं कितने 'अपने से' ही
नामों से पुकारता नज़र आया.....

ज़रूरत थी जब किसी अपने की मैं खुदा को ढूंढ़ लाया....

I can't love you anymore

I have loved you a lot,
But I am sorry,
I can't love you anymore.

I want you to be my forgotten past,
I want you to be my puzzle's lost part,
I want you to be the broken star.

I don't wish to break your heart,
I simply want you to apart,
I don't want you to miss me again,
I simply want you to walk away,
I don't want you to be mine,
I simply want to live without the dreamy nights.

I can't see tears in your glittering eyes,
I can't see your pleasant smile turn into cries.

I can't find a 'Reason' to love you like before,
That's the only reason,
I can't love you any more.

You will be in love...

Its a dream today,
but I know dream has to
come true someday.

I don't know when will it be,
tomorrow or today,
But I believe,
You will be in love with me someday.

It will be your desire
to hold me in your arms,
and wish that we never apart.

I know you will gaze at me
as if you would never see me again,
You wish to take away my picture
in your heart and look at it
whenever it says.

Your eyes speak
What you never wish to say,
I don't know when will it be,
tomorrow or today,
But I believe,
You will be in love with me someday....

Paper Out...!!!



यारों आज किस्सा गज़ब का हुआ है,
Boys Hostel की corridors से लेकर
Girls Hostel की gossips तक में
नाम हमारा शामिल हुआ है।
English का Paper Out हुआ है,
अफवाहें उडी है, साथ उनके नाम हमारा भी चला है।
बदनामी में ही सही आज
नाम बड़ा मशहूर हुआ है।

Senior ने रौब जमाते हुए
Phone पर नाकाबिलियत का Loudspeaker बजाया है,
"अबे सुन! मैं 3rd year का senior बोल रहा हूँ,
English में First Year की back है।
कल क्या आ रहा है बता मुझे..."
बड़े बेशर्म senior हैं, Fail हो कर
रौब जमाते हैं, इसे बहादुरी बताते हैं।
तीन साल में English नहीं पढ़ पाए
वो हमें धमकाते हैं।

दोस्तों ने भी आज हमारे ही Number घुमाये हैं,
"कल क्या आ रहा है... यार... Please बताना... "
पूछने के कई जुगाड़ बैठाये हैं,
गालियों से सीधे 'Please' की तहज़ीब पर आज
सब ने Full Stop लगाये हैं।

कुछ भी कहो यारों आज
'अजीब' सी खुशी मिली है,
अफवाहों में ही सही आज
बात सिर्फ़ हमारी ही चली है.... :)

Random Thoughts...

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
You may have a million Excuses
for your failure but only a single Reason
for your Success.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
Every time I think of you,

I think this would be the last time
I am thinking of you.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
Its better to live alone
than to be left alone.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

ग़लत-फहमी में जीने दे

आज होंश तू मेरे गुम रहने दे,
जी लिया हूँ बहुत मैं 'हकीक़त' के ज़माने में,
अब बेहतर है तू मुझे ग़लत-फहमी में जीने दे।

भीड़ में खो जाता हूँ अक्सर,
बेहतर है मुझे ग़लत-फहमी में
अकेले ही चलने दे।

आहें उठती हैं यहाँ दर-ब-दर,
बेहतर है मुझे ग़लत-फहमी में
धडकनों के साज़ सुनने दे।

झूठे मुस्कुराते चेहरे कई दीखते हैं इधर-उधर
बेहतर है मुझे ग़लत-फहमी में
अकेले ही सिसकने दे।

दर्द और ज़ख्मों के सहारे मिलते हैं बस यहाँ पर,
बेहतर है मुझे ग़लत-फहमी में
बेसहारा ही रहने दे।

हादसों पर हादसे होते हैं हर मोड़ पर,
बेहतर है मुझे ग़लत-फहमी में
चैन औ सुकून से मरने दे।

'अजीब' सी यह हसरत पूरी करने दे,
आज होंश तू मेरे गुम रहने दे,
बेहतर है तू मुझे ग़लत-फहमी में जीने दे।

तेरी मेरी ज़िन्दगी एक होगी

कब दिल मेरा तेरा गुलाम नहीं होता
तुझे शायद ख़बर भी ना होगी,
गौर से सुनना कभी हर धड़कन तेरी
मुझ ही को पुकारती होगी।

निघाहें तेरी कहती है,
अजनबी सी पेश आए तो वो तेरी अदा होगी,
जो देख कर मुझे नज़रें चुराए,
तो अकेले में मुस्कुराती होगी।

दुआओं में मेरी असर है इतना,
हर ख्वाहिश तेरी पूरी होगी,
जो टूटे कोई ख्वाब तो मुझसे कहना,
दामन में तेरे खुशियाँ बेशुमार होगी।

तुझे सोचता हूँ हर लम्हा,
मुमकिन है की तुझे भी मेरी ज़रूरत होगी,
जो रह न सके तू पल भर भी तन्हा,
तो यकीनन तेरी मेरी ज़िन्दगी एक होगी।

तुझे मेरी ज़रूरत होगी

जब आँखें तेरी नम होगी,
जिस दिन हँसी भी लबों से गुम होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब दर्द उठेगा दिल में तेरे,
जिस दिन पलकें तेरी भीगी होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब गुलशन भी खफा होंगे तुझसे,
जिस दिन मौसम की बेरुखी होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब ख्वाब कोई टूटेगा तेरा,
जिस दिन ज़माने भर की आंधियां होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब कभी किस्मत भी तेरी धोखा देगी तुझे,
जिस दिन यकीन भी न होगा तुझे ख़ुद पे,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

जब खुदा भी साथ न होगा तेरे,
जिस दिन किसी अपने की कमी महसूस होगी,
उस दिन शायद तुझे मेरी ज़रूरत होगी।

हालात कई ऐसे होते हैं...

हालात कई , ज़िन्दगी बदल देते हैं,
मजबूरियों को आदत बना देते हैं,
हसरत नहीं होती किसी की, जीने की इस तरह,
वो जीते-जी मरना सीखा देते हैं....

जीता नहीं कभी....

जीता नहीं कभी आज तलक, पर आज हारना चाहता हूँ,
पाया नहीं कुछ अब तलक, पर अब जो कुछ है अपना,
सब खोना चाहता हूँ...

उम्मीदों के सहारे....

उम्मीदों के सहारे जी रहा हूँ आज,
कल उम्मीदों को मेरा सहारा होगा...

(आएगा कोई शख्स किसी दुनिया से,
जो सिर्फ़ हमारा होगा...)

हर बार की तरह...

हर बार की तरह इस बार भी
कुछ बुरा ही हुआ है,
हर बार की तरह इस बार भी
मैंने यही सोचा है ,
जो होता है अच्छे के लिए होता है,
जो हुआ है बुरा तो इसमें भी
कुछ अच्छा ही होगा,
हर बार की तरह इस बार भी
दिल को यही दिलासा दिया है,
अभी ना हुआ हो पर शायद,
आने वाले वक्त में तो कुछ अच्छा होगा,
आने वाला कल आज से कुछ बेहतर होगा,
हर बार की तरह इस बार भी
चला है जो ये सिलसिला बुरे का,
हर सिलसिले की तरह यह भी
कहीं ख़त्म तो होगा,
इस ज़िन्दगी के उस ओर
कोई छोर नया होगा,
वहाँ शायद कुछ अच्छा होगा,
हर बार की तरह इस बार भी
उम्मीदों का सहारा तो होगा....

I Should Smile....











When, I have shattered dreams in my eyes,

When, my heart cries,
When, I am alone in the shadows of silence,
When, memories turn back the tides,
At the Times I feel, I should smile.

When, I am driven by emotions,
When, I have no more affections,
When, I miss someone,
When, I lose without a reason,
At the Times I feel, I should smile.

When, in the world of lies, I have to be 'DIVINE',
When, nothings all right,
When, I suffer through sleepless nights,
When, I have to say, "everything will be fine",
At the Times I feel, I should smile.

When, I am a stranger in the crowd,
When, to speak up I have to be loud,
When, to prove myself I need to shout,
When, I have to be the 'odd one out'
At the Times I feel, I should smile.

रे मर जाएगा क्यूँ सोंचे है ...

कल क्या होगा,क्यूँ सोंचे है
मर जाएगा, क्यूँ सोंचे है ॥

खुद को तक, गिरवी रक्‍खा है
बिक जाएगा ,क्यूँ सोंचे है

अपना घर कितना अपना है
वो आएगा ,क्यूँ सोंचे है ॥

शेर नहीं दिल, के छाले हैं
वो समझेगा ,क्यूँ सोंचे है ॥

बीत गया जो, रीत गया जो
फ़िर लौटेगा ,क्यूँ सोंचे है ॥

अर्श है बेबस ,इस दुनिया में
पछतायेगा , क्यूँ सोंचे है ॥

प्रकाश"अर्श"
http://prosingh.blogspot.com/

My Anti-terrorist creation in Photoshop

click the image to view full size image.

ज़रूरत थी जब...

ज़रूरत थी जब किसी अपने की
मैं खुदा को ढूंढ़ लाया ......


जरुरत थी जब किसी अपने की,मैं खुदा को ढूंड लाया..
वो आशना भी आया जब ना-आशनाको ढूंड लाया ...

credits: Mr. Prakash Singh 'Arsh'
http://prosingh.blogspot.com/


जरुरत थी जब किसी अपने की मै खुदा को ढूंढ़ लाया
बेवफा बेगैरतों की बस्ती से मै एक वफ़ा को ढूंढ़ लाया
तन्हाई न करे महशूस रात भर कहीं अँधेरे उस घर के
मेरे दिल की तरह जलती है जो उस शमा को ढूंढ़ लाया

credits: Mr. "SURE"
http://dreamstocometrue.blogspot.com/
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