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किस्मत किस तरह...

किस्मत किस तरह धोखा देती है हमने देखा है,
अपने भी कब अजनबी बन जाते है हमें सब पता है,
किसी से शिकायत नहीं करता मैं,
पर ये नासमझ दिल बहुत रोता है...
(दर्द इस दिल का आंखों से झलकता है,
फ़िर कभी भरे पैमाने की तरह छलकता है....)

1 comments:

"SURE" said...

very interesting blog.punit ji aap ka lekhan aur chintan dono apealing lage

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