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शरारत

खुली जुल्फों को देख कर उसकी,
शरारत हवाओं को सूझ रही थी,
हवाओं के इस रुख को ,
हैरान उसकी निघाहें देख रही थी।

परेशान कर रही थी हवाएं,
उसे छेड़ रहीं थी,
बड़ी मासूमियत के साथ वो
उनसे जगड़ रही थी।

चहरे की सिलवटों में उसकी
गज़ब की अदाएं थी,
जुल्फ सवारते उन नाजुक
हाथों को थाम लेने की हसरत
इस दिल में पल रही थी।

कुछ उडी-उडी,
कुछ चहरे पे रुकी - रुकी ,
जुल्फें उसकी सावन की घटाएं थी
हवाओं की भी कोशिश आज
बिन मौसम बरसात की लग रही थी।

7 comments:

ई-गुरु राजीव said...

बहुत ही रोमैंटिक हो भाई, कहीं प्यार ना हो जाए.

अनुपम अग्रवाल said...

25th post kee badhaai.nice roomanee thoughts.
likhte rahiye.

"SURE" said...

silver jubily mubarik ho.bahut hi sundar blog hai aapka

Bahadur Patel said...

bahut badhiya hai. badhai.

"SURE" said...

शुभ नव वर्ष २००९ आपको सपरिवार मंगलकामनाएं

विनय said...

नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ, यह आपके लिए सुख व समृद्धि लाये। शुभ वर्ष 2009!

उन्मुक्त said...

सुन्दर कविता।

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