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माँ

माँ ! थक गया हूँ बहुत,
आज, थोड़ा आराम करने दे, माँ।

माँ ! कई रातों से सोया नहीं,
आज, अपनी गोद में सर रखने दे, माँ।

माँ ! तेरी छुवन महसूस किए कई महीने गुज़र गए,
आज, अपने हाथों से मेरे बालों को सहला दे, माँ।

माँ ! एक ज़माना गुज़र गया किसी ने प्यार से पुकारा नहीं,
आज, एक लोरी तू सूना दे , माँ।

माँ ! किसी को वक्त नहीं कि मुझसे बात करे,
आज, एक कहानी तू कह दे, माँ

माँ ! इस भीड़ में मुझे किसी ने सुना नहीं,
आज, तू मुझे कुछ कहने दे, माँ।

माँ ! याद तू रोज़ आई पर ये आंसू ना आए,
आज, तू मुझे थोड़ा रोने दे, माँ ।

माँ ! बहुत थक गया हूँ जी कर इस तरह,
आज, तू मुझे सोने दे , माँ।

3 comments:

परमजीत बाली said...

माँ शब्द ही बड़ा प्यारा है।सुन्दर लिखा है।

Parul Singh said...

Aww!!! very sensitive piece of writing....

keep the good wrk on

प्रकाश बादल said...

kyaa khoob kaha hai likhte rahen

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