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तेरी तस्वीर को आईना बनाकर
मैं तेरी निघाहों में ख़ुद को
ढूँढने का बहाना करता हूँ,
सच तो यह है कि,
तेरी खामोश नज़रों में
मैं तेरी अनकही बातें ढूंढता हूँ,
ढूंढता हूँ मेरे सवालों का जवाब ,
और वो मोहब्बत जो तू
जताती नहीं उसे ढूंढता हूँ,
मुझे देख कर मुस्कुराती है तू
पर बतियाती नहीं,
इसकी वजह ढूँढता हूँ,
तेरी खूबसूरती को
किस तरह बयान करूँ,
हर वक्त बस वही लफ्ज़
वही खयालात ढूंढता हूँ....

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