Theme Preview Rss

ये क्या हुआ है मुझे...




ये क्या हुआ है मुझे
कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ।
किसी से बात नहीं करता मैं,
कुछ लिख भी नहीं पा रहा हूँ,
बस अपने ही दायरे में
सिमटता चला जा रहा हूँ।

कोई बात नही अब खुशी की मेरे लिए,
ना ही कोई ग़म भरी रात है जागने के लिए,
अकेलेपन ने इस कदर घेरा है मुझे,
अपने ही जज़्बातों को खोता जा रहा हूँ।

दर्द दिल का जताता नही किसी से,
मुस्कुराता भी नही मैं,
ना ही ठीक से रो पा रहा हूँ,
किस दौर से गुज़र रहा हूँ मैं,
ये क्या हुआ है मुझे
कुछ समझ नही पा रहा हूँ।

6 comments:

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

स्वागतम

नारदमुनि said...

sahi baat hai
narayan narayan

Abhishek said...

दर्द दिल का जताता नही किसी से,
मुस्कुराता भी नही मैं,
ना ही ठीक से रो पा रहा हूँ,
किस दौर से गुज़र रहा हूँ मैं,
ये क्या हुआ है मुझे
आता है ऐसा दौर भी. अच्छा लिखा है आपने.
स्वागत मेरे ब्लॉग पर भी.

Amit K. Sagar said...

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
---
आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
---
अमित के. सागर
(उल्टा तीर)

Puneet Sahalot said...

aap sabhi ko hardik dhanyawaad

koshish karunga ki main kuchh naya seekhun
or kuchh behatar likh sakun

रचना गौड़ ’भारती’ said...

भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

Related Posts Widget for Blogs by LinkWithin