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निशानी

तू सताती है, हंसाती है, रुलाती है
फ़िर भी हर शरारत तेरी
नज़ाकत कहलाती है

तेरा नज़रें चुराना, मिलाना,
मुझे देख कर यूँ मुस्कुराना,
ये ही तो वो बातें हैं
जो याद आती है

तेरा वो पलकें झुकाना, उठाना,
उठा कर फ़िर से झुकाना,
ये ही सब हरकतें है तेरी
जो अदा कहलाती हैं

धड़कनें मेरी साँसे तेरी,
सारे ज़माने भर से
सिर्फ़ बातें तेरी
ये ही तो है 'निशानी' उसकी
जो 'मोहब्बत' कहलाती है।


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