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ख्यालों से शुरुआत हुई थी ,

ख्वाबों में तुमसे मुलाक़ात हुई थी,

लबों ने चाहे कुछ न कहा हो मगर,

आंखों ही आंखों में कोई बात तो ज़रूर हुई थी


लाख कोशिश की थी तुमने

दामन अपना चुराने की ,

ख़ुद को मुझसे बचाने की,

पर दिल में तुम्हारे भी

कोई हलचल तो ज़रूर हुई थी


नज़रें
तुम्हारी झुकी - झुकी सी थी ,

लबों की हँसी भी हया से रुकी रुकी सी थी ,

पर चोरी छुपे मुझे देख कर

मुस्कुराने की खता तो ज़रूर हुई थी।


कुछ शरमाई हुई सी तुम थी,

कुछ घबराई हुई सी तुम थी,

और अचानक से मेरे छू कर

गुज़र जाने पर तुम्हें,
धड़कनें तुम्हारे दिल की भी
तेज़ तो ज़रूर हुई थी

हकीक़त में ना हुई हो भले ही
पर ख्वाबों में ही सही
इज़हार--मोहब्बत की
बात तो ज़रूर हुई थी




5 comments:

Arun kumar verma said...

Puneet bhai gajab dha rahe ho. yaar bahut shundar kavita likhi. keep it up

Puneet Sahalot said...

thank u bhaiya..!!

Neha Maheshwari said...

mast b2

Mayanand Jha said...

very nice poem, puneet. Your expressions in romantic poems are very nice, very tender and delicate. Keep it up.

Puneet Sahalot said...

thanks bhaiya...!!

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