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तलाश

अनकहे सवालों के जवाब ढूंढ रहा हूँ,
खामोशी में गुम कोई आवाज़ ढूंढ रहा हूँ ।

रात के अंधेरों में उजालों की परछाई ढूंढ रहा हूँ,
पुरानी उन यादों में फ़िर कोई नई बात ढूंढ रहा हूँ ।

इन अनजान चेहरों में कोई अपना ढूंढ रहा हूँ,
बंद लिफाफों में पैगाम कोई अपने नाम ढूंढ रहा हूँ ।

खोई हुई उन राहों में मंजिल अपनी ढूंढ रहा हूँ,
भीड़ में शामिल अपनी 'शख्सियत' ढूंढ रहा हूँ ।

झूठी इन तस्वीरों में आईना कोई सच का ढूंढ रहा हूँ,
हाथ की इन लकीरों में तकदीर अपनी ढूंढ रहा हूँ ।

मुरझा गए है क्यूँ ये फूल सभी...??
इनकी खोयी मुस्कान ढूंढ रहा हूँ...
बेजान इन पत्थर दिलों में आज
एक नई जान ढूंढ रहा हूँ....

तलाश ये अधूरी है आज भी...
जब होगी ये पूरी...
वो दिन वो रात ढूंढ रहा हूँ...


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