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यूँ ही थाम कर हाथ मेरा

यूँ ही थाम कर हाथ मेरा
तुम बैठी रहो,
कोई बात सुनो मेरी
या तुम ही कुछ कहती रहो.

झुकी हुई इन पलकों को अपनी ,
जो उठाओगी इस तरह ,
चोट किसी दिल को लग जायेगी ,
इस अदा को देख कर तुम्हारी ,
नज़रें आईने की भी शर्म से झुक जाएँगी.

नज़रों से मेरी
नज़रें अपनी मिलाओ,
धड़कनें सुनो मेरे दिल की
या कुछ तुम ही मुझे सुनाओ.

मुस्कुराओगी जो तुम इस तरह,
कलियाँ भी तुम से रूठ जाएँगी,
चेहरा अपना छुपा लो आँचल में कि,
चांदनी चाँद कि भी
कहीं बादलों में खो जायेगी .

मदहोश इस समां को
यूँ खामोश ना बनाओ,
कोई नगमा प्यार का,
मैं सुनाऊं तुम्हे,
या तुम ही कुछ गुनगुनाओ .

बस यूँ ही थाम कर हाथ मेरा
तुम बैठी रहो ,
कोई बात सुनो मेरी
या तुम ही कुछ कहती रहो.

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